11 साल की गायिका अनन्या ने अपनी सुरीली आवाज से छत्तीसगढ़ के लोगों का दिल जीता ….स्पेशल इंटरव्यू…


रायपुर। छत्तीसगढ़ की माटी से बेहद लगाव रखने एवं लोक गीत, लोक संगीत के क्षेत्र में कम उम्र में नई ऊंचाइयों को छूने वाली सिहावा – नगरी वनांचल क्षेत्र की 11 वर्षीय कुमारी अनन्या नाग जिन्होंने अपने सुमधुर आवाज से छत्तीसगढ़ वासियों का दिल जीता है एवं सिहावा नगरी क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
अनन्या नाग ईओडब्ल्यू रायपुर में पदस्थ एडिशनल एसपी श्री महेश्वर नाग की सुपुत्री हैं।
अनन्या नाग डीपीएस रायपुर में अध्ययनरत हैं तथा संगीत की शिक्षा कमला देवी संगीत महाविद्यालय रायपुर से ले रही हैं।
2 वर्ष पूर्व चिकित्सा विभाग के लिए टीकाकरण जागरूकता अभियान में मीजल्स रूबेला वायरस से कैसे बचें, विधानसभा चुनाव 2018 में मतदाता जागरूकता अभियान में एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत कवर्धा नगर पालिका निगम के लिए भी गाना गाया है जिस पर कलेक्टर कवर्धा, एसपी कवर्धा ने
अनन्या नाग को प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ी बोली भाखा और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा देने एवं वर्तमान पीढ़ी जिन्हें छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं रीति रिवाज का ज्ञान नहीं है उन्हें माता जसगीत एवं छत्तीसगढ़ी सुवा गीत के माध्यम से हमारी संस्कृति से रूबरू कराने का सफल प्रयास अनन्या नाग के द्वारा किया जा रहा है।
अनन्या के पापा श्री महेश्वर नाग एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस के अधिकारी के साथ अच्छे गायक भी है। अनेक अवसरों पर अपनी गायकी के माध्यम से समाज को अच्छा संदेश दिया है।
अनन्या के दादा अमृत लाल नाग एवं दादी श्रीमती तुलसी देवी नाग ने चर्चा में कहा कि इतनी छोटी उम्र में पोती अनन्या की उपलब्धियों से परिवार का मान बढ़ा है। हम उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।

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अनन्या का संक्षिप्त परिचय : अनन्या की प्रारंभिक शिक्षा अंबागढ़ चौकी, दल्लीराजहरा से शुरुआत हुई। कोंडागांव से पहली दूसरी एवं तीसरी की पढ़ाई पूरी की और कवर्धा से चौथी की परीक्षा पास की। डीपीएस रायपुर से पांचवी की परीक्षा पास कर वर्तमान में छठवीं कक्षा में अध्ययनरत अनन्या शुरू से ही मेधावी छात्रा रही है और अच्छे अंक अर्जित कर परीक्षा पास किया है।
अनन्या के गीतों का प्रसारण दूरदर्शन एवं माय एफएम में तथा एक न्यूज़ चैनल छत्तीसगढ़ – मध्य प्रदेश में भी प्रसारण किया गया है।
अपने स्कूल में 26 जनवरी एवं 15 अगस्त के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी अपनी प्रस्तुति देते हुए आ रही है साथ ही शहरी आयोजनों में भी गीत – संगीत प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम स्थान पर रहीं ‌हैं।
पढ़ाई के साथ गीत – संगीत में उनकी मम्मी श्रीमती सृष्टि नाग, पापा श्री महेश्वर नाग, उनकी छोटी बहन कु. अलायना नाग का विशेष सहयोग मिल रहा है साथ ही करिज्मा स्टूडियो रायपुर के परवेज खान संगीतकार का सहयोग भी उन्हें निरंतर मिल रहा है।

कु.अनन्या नाग द्वारा गाए हुए गीतों के कुछ अंश

“टीकाकरण जागरूकता अभियान”
गीत – मीजल्स रूबेला आ गया, रोग ये समझा गया।
इससे बचना बचाना है, टीका सबको लगाना है।।

“मतदाता जागरूकता अभियान”
गीत- लोकतंत्र का आया है, त्यौहार बड़ा ही प्यारा।
नर नारी सब वोट करेंगे, ईवीएम के द्वारा।

“स्वच्छता जागरूकता अभियान”
गीत- है सबकी भागीदारी है सब की जिम्मेदारी।
स्वच्छ भारत, स्वच्छ कवर्धा, मेरा कवर्धा, मेरा कवर्धा।।

“छत्तीसगढ़ी जसगीत”
ओ मैय्या तोरे सहारा, चमके करम के तारा।
दे दे मया दुलारा मया अऊ बरसा दे आशीष ओ।
गांव – गांव अऊ गली गली गूंजे मोरे गीत ओ।।

“छत्तीसगढ़ी सुवागीत”
गीत – मोर देवारी के दिया, करे जग म अंजोर।
बगरे गांव गली खोर, सजगे अंगना म ।
मोर देवारी के दिया…।।
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कु. अनन्या नाग अपने मम्मी – पापा और छोटी बहन के साथ गृह नगर नगरी में दीपावली त्योहार मनाने आयी हुई हैं और काफी खुश हैं और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों एवं मिठाइयों का भरपूर आनंद उठाया है। और घर में रंगोली बनाकर दीये भी जलाये हैं।

इस अवसर पर हमारे प्रतिनिधि ने “अनन्या नाग” से खास बातचीत की –

इतनी कम उम्र में गाने को विचार कैसे आया?
– मैं बचपन से गाना सुनती थी।घर के सदस्य बताते है कि जब मैं रोती थी तो लोग गाना बजा दिया करते थे और मैं तुरंत चुप हो जाती थी।और ध्यान से गाना सुनने लगती थी। जब थोड़ी बड़ी हुई तब मैंने टीवी पर आने वाले गाने को सुनकर उनके साथ साथ गाना शुरू कर दिया।

आप अपना प्रेरणास्रोत किसे मनाते है?
– मैं अपने मम्मी और पापा को अपना प्रेरणास्रोत मानती हूं। पापा – मम्मी जैसे खूब पढ़ाई करके बड़ा अधिकारी बनना चाहती हूं और पापा जैसे समाज के लिए अच्छे – अच्छे गाना गाकर समाज को संदेश देना चाहती हूं।

छत्तीसगढ़ी गीत गाकर कैसे महसूस करते हैं?
– छत्तीसगढ़ की संस्कृति बहुत समृद्ध है यहाँ के लोग बहुत सीधे और मिलनसार है। मुझे छतीसगढ़ी गाना गाकर बहुत गर्व महसूस होता है। मैं जब नगरी आती हूं सबको छत्तीसगढ़ी में बात करते सुनकर बहुत अच्छा लगता है। छतीसगढ़ी बोली बहुत मीठी है और यहाँ का संगीत भी बहुत कर्णप्रिय है।

पढ़ाई और गायन दोनों एक साथ कैसे कर लेते हैं?
– मुझे पढ़ने की प्रेरणा मम्मी से मिलती है और मम्मी पढ़ाई के लिए बहुत सख्त भी है।स्कूल के होम वर्क और टेस्ट में अच्छे नंबर लाने के लिए वो मुझे खुद पढ़ाती है। पापा एक पुलिस अधिकारी होने के साथ साथ बहुत अच्छा गाना भी गाते हैं। पापा हमेशा मेरे साथ रिकॉर्डिंग के लिए जाते हैं और गानों का चयन भी करते है।पापा के फ्रेंड सर्किल में अच्छे गायक, एक्टर, डायरेक्टर और लेखक है इसलिए मुझे संगीत के संबंध में कोई भी दिक्कत नहीं होती।
मैं कमला देवी संगीत महाविद्यालय रायपुर से मध्यमा प्रथम की गायन की छात्रा भी हूं। एन डी केहरि सर से गायन में मुझे बहुत सहयोग मिलता है।

गायन में रुचि है या शौक?
– गायन में मेरी रुचि है और गाना मेरा शौक भी है।

आप अपने जीवन में किस उपलब्धि को पाना चाहते हैं?
– मैं एक अच्छी प्लेबैक सिंगर बनना चाहती हूं।मुझे मिमिक्री करने का भी शौक है इसलिए बच्चों के लिए कार्टून के माध्यम से एनिमेटेड वीडियो पर भी काम कर रही हूं जिससे बच्चों को ज्ञान वर्धक कहानियां मिल सके।जल्दी ही मेरे यूट्यूब चैनल
‘Ananya Voice Creations” के माध्यम से एनिमेटेड कहानियां प्रसारित की जाएगी।अच्छे से पढ़ाई करके एक प्रशानिक अधिकारी भी बनना चाहती हूं।

आप नगरी – सिहावा अंचलवासियों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
– अंचल के नागरिकों से अपील करती हूं कि छत्तीसगढ़ की परंपराओं को हमें संजोके रखना चाहिए और छत्तीसगढ़िया होने पर गर्व करना चाहिए।
वर्तमान में कोरोना महामारी से बचने के लिए हमेशा हाथ धोना चाहिए ,मास्क लगाना चाहिए और सोशल डिस्टेन्स का पालन करना चाहिए।
चाइना समान का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाना चाहिए। गरीबों की मदद करनी चाहिए।
मैंने अपने गाने के वीडियो में भी लोकल दुकानों से खरीदी करने,ऑनलाइन खरीदी नहीं करने का संदेश दिया है।आप सभी एक बार मेरे गाने को जरूर सुने।

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