‘सूरमा भोपाली’ पहुंच गए थे जगदीप से लड़ने मुंबई

मुंबई, देशभर में सूरमा भोपाली के नाम से मशहूर जगदीप ऊर्फ सैयद इश्तियक जाफरी अब इस दुनिया में नहीं रहे, बुधवार की रात दुनिया से रुखसत हो गए । उनके जाने से बॉलीवुेड में कॉमेडी के उस युग का अंत हो गया, जिस वक्त महमूद, केश्टो मुखर्जी, राजेंद्रनाथ, जॉनी वाॅकर, और जगदीप जैसे कलाकार हुआ करते थे. 

कोरोना लॉकडाउन के दौरान वे काफी कमजोर हो गए थे और आखिरकार 8 जुलाई को अपने पीछे 6 बच्चों और नाती-पोतों से भरा परिवार छोड़कर दुनिया से कूच कर गए। बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करियर की शुरुआत करने वाले जगदीप ने हिन्दी सिनेमा में तमाम मुश्किलों से ऊपर अपना एक खास मुकाम बनाया।  81 साल की उम्र में भी जगदीप बेहद जिंदादिल से बीमारियों से जूझ रहे थे।

असली वाले सूरमा भोपाली पहुंचे लड़ने

फिल्म ‘शोले’ का ‘सूरमा भोपाली’ के किरदार की कहानी भी रोचक है। दरअसल, भोपाल में अरसे तक रहे जावेद अख्तर ने नाहर सिंह के किस्से सुन रखे थे। और ‘सूरमा भोपाली’ का किरदार भोपाल के फॉरेस्ट ऑफिसर नाहर सिंह पर आधारित था। इसलिए जब उन्होंने सलीम के साथ फिल्म ‘शोले’ लिखना शुरू किया, तो उन्होने कॉमेडी का पुट डालने के लिए नाहर सिंह से मिलता किरदार ‘सूरमा भोपाली’ तैयार कर दिया।

फिल्म रिलीज़ हुई और ‘सूरमा भोपाली’ मशहूर हो गए, लेकिन इधर, भोपाल में नाहर सिंह का काफी मज़ाक बनने लगा। नाहर सिंह सलीम-जावेद से खफा हो गए। एक तो उनका फिल्म में मज़ाक बनाया, ऊपर से फॉरेस्ट ऑफिसर को लकड़हारा बना दिया। ऐसे में नाहर सिंह सीधे मुंबई पहुंच गए और जगदीप के सामने आकर लड़ाई की मुद्रा में खड़े हो गए थे ।

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