सकारात्मक ख़बरों से समुदाय में आता है बदलाव, काम करने की मिलती है प्रेरणा: डॉ. मल्लिकार्जुन


रायपुर/बिलासपुर। कोरोना काल में संक्रमण का शिकार हो चुके लोगों को मानसिक परेशानी से बाहर निकालने के लिए स्पर्श क्लीनिक में लगातार सेवा दे रहे मनोरोग चिकित्सक डॉ. मल्लिकार्जुन रॉव का कहना है मीडिया में खबर आने से न सिर्फ उन्हे और अच्छे से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है, बल्कि समाज में लोग उनके द्वारा बताई गयी बातों से जागरूक भी होते हैं।साथ ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों के मन में बदलाव भी आता है |
डॉ राव ने बताया आज स्वास्थ्य कर्मी जो कोरोना से लड़ पा रहे हैं इसमें मीडिया का काफी बड़ा योगदान है। “मीडिया के माध्यम से ही हम अपनी बातों को लोगों तक आसानी से पहुंचाते हैं। इतना ही नहीं मीडिया के माध्यम से हमारे काम के बारे में जानकारी प्राप्त होने से लोग प्रभावित होते हैं और उनका व्यवहार भी हमारे प्रति बदलता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की मांग में भी वृद्धि होती है |’’
उन्होंने बताया, आमतौर पर यह देखा गया है कि मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित जब भी कोई सकारात्मक खबर अखबारों में प्रकाशित होती है तो उसके बाद मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आने वाले लोगों की संख्या में काफी इजाफा होता है |
“मीडिया के कारण ही लोगों की हमारे प्रति सोच बदलती है जिससे हमें काफी सुकून मिलता है| साथ ही और अच्छे से काम करने के लिए उर्जा भी मिलती है। कोरोना काल में ही एक समय था जब लोग हेल्थ वर्कर से दूर भागते थे, उन्हें अपने घर से निकाल देते थे और आज उनकी सोच इतनी बदल गई है कि वह लोग उन्हें सम्मान की नजरों से देखते हैं और आदर भी देते हैं,‘’ डॉ मल्लिकार्जुन राव ने बताया|
वह मानते हैकाम के प्रति समर्पण भाव से ड्यूटी करना ही असली सेवा है, फिर वो चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। यही कारण है कि वह समय से अपनी ड्यूटी पर राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी पहुंच जाते हैं और मानसिक रोगियों के साथ-साथ कोरोना संक्रमण के डर से मानसिक वेदना के शिकार हुए लोगों को परामर्श प्रदान कर उनकामार्गदर्शन कर रहे हैं।
कोरोना संक्रमण के डर के बावजूद लगातार ड्यूटी करने के बारे में डॉक्टर मल्लिकार्जुन का कहना है वह लोग कोरोना वारियर्स हैं और अगर वह ही अपनी ड्यूटी से पीछे हट गएया कोरोना से डर गए तो राज्य या देश के लोगों का क्या होगा। उनका कहना है उनके जैसे कई ऐसे शासकीय सेवक हैं जो अपने घर परिवार और खुद की सुरक्षा को एक तरफ रखकर अपने देश और राज्य की सेवा पूर्णता समर्पित होकर कर रहे हैं। ,“वह अपनी ड्यूटी समाज में हीरो बनने के लिए नहीं करते बल्कि लोगों की सेवा करने के लिए करते हैं और जब उनकी सेवा और कार्यों के बारे में लोग प्रशंसा करते हैं तो बहुत अच्छा लगता है और नई ऊर्जा के साथ काम करने की प्रेरणा भी मिलती है।‘’
कोरोना पॉजिटिव हुए और ठीक होते ही पहुंचे ड्यूटी पर डॉ. मल्लिकार्जुन नवंबर महीने में कोरोना से संक्रमित भी हुए थे। घर पर रहकर उन्होंने अपना उपचार किया और जैसे ही उनकी रिपोर्ट नगेटिव आई वह फिर से ड्यूटी पर पहुंच गए और लोगों को अपनी सेवायें देने लगे |

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