सूर्योपासना के महापर्व छठ की शुरुआत आज नहाय.खाय के साथ


रायपुर। दुनिया उगते हुए सूरज को प्रणाम करती है लेकिन लोकतंत्र और माता सीता की जननी बिहार उगते हुए सूरज को ही नहींए डूबते हुए सूर्य को भी प्रणाम करता है। इसके लिए चार दिन का सबसे अधिक सुचिता का लोक पर्व छठ किया जाता है। अब यह महापर्व बिहार से शुरू होकर देश की राष्ट्रीय राजधानी, आर्थिक राजधानी समेत तमाम महानगर और हिंदी भाषी प्रदेशों तक पहुंच चुका है।
चार दिवसीय महापर्व की शुरुआत बुधवार को नहाय-खाय के साथ होगी और समापन शनिवार की सुबह उदयाचल गामी सूर्यदेव को अघ्र्य देने के साथ होगी। शहर से लेकर गांव तक में सुचिता के साथ जोरदार तैयारी की गई है। गांव में बांस के बने सूप खरीद लिए गए हैं, प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे भी तैयार हैं। अन्य त्योहार की तरह छठ पर भी आधुनिकता का रंग दिख रहा है, बावजूद इसके सबसे अधिक सुचिता के साथ मनाए जाने वाले इस पर्व में अभी भी गांव के मिट्टी की खुशबू है।
नहाय.खाय के दिन स्नान करने के बाद व्रती सबसे पहले प्रसाद के लिए गेहूं साफ करेगी। उसके बाद अरवा चावल, चना का दाल और कद्दू की सब्जी स्वच्छता पूर्वक बनाकर सपरिवार ग्रहण करेंगी। दोपहर में छठी मैया एवं सूर्यदेव के प्रसाद के लिए गेहूं, लड्डू बनाने के लिए चावल आदि की तैयारी की जाएगी। गुरुवार को सुबह से निराहार व्रत शुरू कर देर शाम खीर पुरी का भोग लगाने के बाद पहले दिन के व्रत का समापन और 36 घंटे का निराहार व्रत शुरू हो जाएगा। शुक्रवार को संध्या बेला में डूबते हुए अस्ताचल गामी सूर्यदेव और शनिवार की सुबह उगते हुए ;उदयाचल गामी सूर्यदेव को अघ्र्य देने के बाद पारण कर व्रती इस महापर्व का समापन करेंगेे।

शेखर झा की रिपोर्ट……

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